मऊ। जनपद में राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के बैनर तले बिजली विभाग के दर्जनों जूनियर इंजीनियरों (जेई) का अपनी मांगों को लेकर च...
मऊ। जनपद में राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के बैनर तले बिजली विभाग के दर्जनों जूनियर इंजीनियरों (जेई) का अपनी मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है. सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जूनियर इंजीनियरों ने कड़ाके की धूप के बीच अधीक्षण अभियंता (एसई) कार्यालय परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया. यह बेमियादी धरना विभाग द्वारा बिना निष्पक्ष जांच के निलंबित किए गए दो जूनियर इंजीनियरों की तत्काल ससम्मान बहाली और आंधी-तूफान के इस मौसम में निर्बाध आपूर्ति बहाल रखने के लिए आवश्यक संसाधनों को उपलब्ध कराने की मुख्य मांग को लेकर किया जा रहा है. इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और धरने से विभागीय कामकाज पर भी असर पड़ने लगा है।
संगठन के जिला सचिव जमुना प्रसाद ने धरने को संबोधित करते हुए विभाग के उच्चाधिकारियों पर तानाशाही का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि जूनियर इंजीनियर अरुण कुमार पांडे और सत्येंद्र कुमार को बिना किसी निष्पक्ष व विस्तृत जांच के, पूरी तरह मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाकर द्वेषवश निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने असल घटना का खुलासा करते हुए बताया कि पिछले दिनों 33 केवी विद्युत लाइन के मेंटेनेंस कार्य के दौरान अचानक पोल टूटने की घटना हुई थी, जो पूरी तरह एक दैवीय आपदा (प्राकृतिक दुर्घटना) जैसी थी. लेकिन विभागीय उच्चाधिकारियों ने प्राकृतिक कारणों को नजरअंदाज करते हुए इसकी पूरी जिम्मेदारी जबरन फील्ड में काम करने वाले अभियंताओं पर थोप दी और एकतरफा निलंबन की कार्रवाई कर दी।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय की क्लीनचिट के बाद भी हठधर्मी
जिला सचिव जमुना प्रसाद ने तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस दुर्घटना को लेकर 'विद्युत सुरक्षा निदेशालय' द्वारा जो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई गई थी, उसमें भी जूनियर इंजीनियर अरुण कुमार पांडे को किसी भी स्तर पर दोषी नहीं पाया गया था. तकनीकी विंग से क्लीनचिट मिलने के बावजूद भी स्थानीय शीर्ष प्रबंधन द्वारा अपनी हठधर्मी के कारण उनका निलंबन समाप्त नहीं किया जा रहा है, जिससे पूरे संगठन, जूनियर इंजीनियरों और लाइन स्टाफ में भारी आक्रोश व्याप्त है. उन्होंने बताया कि तीन दिनों से चल रहे इस शांतिपूर्ण धरने के दौरान अधीक्षण अभियंता ने संगठन के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए अपने चैंबर में बुलाया भी था, जहां बातचीत में सकारात्मक सहमति बनने के संकेत मिले थे, लेकिन धरातल पर अब तक निलंबन निरस्त करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है. संगठन ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि जब तक दोनों निर्दोष इंजीनियरों की बहाली नहीं होती, आंदोलन समाप्त नहीं होगा.
संसाधनों की घोर कमी, ठीकरा फोड़ा जाता है जेई पर
धरना-प्रदर्शन कर रहे बिजली अभियंताओं ने विभाग पर फील्ड वर्क के लिए जरूरी तकनीकी संसाधन और आवश्यक सामान उपलब्ध न कराने का भी एक बड़ा आरोप लगाया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान में चल रहे आंधी-तूफान और भीषण गर्मी के मौसम में ट्रांसफार्मरों व विद्युत लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सामग्रियां जैसे— ट्रांसफार्मर ऑयल, एलटी क्लैंप, लग (Lugs) और फ्यूज वायर (तार) जैसे बुनियादी सामानों की स्टोर में भारी कमी बनी हुई है. उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए बार-बार मांग के बाद भी ये सामान फील्ड स्टाफ को नहीं दिए जाते. कर्मचारियों ने रोष जताते हुए कहा कि संसाधनों की इस घोर कमी के बावजूद यदि क्षेत्र में कहीं ट्रांसफार्मर खराब या फुंक जाता है, तो उपभोक्ताओं और विभाग की गाज केवल जूनियर इंजीनियरों पर ही गिराई जाती है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
